How to Identify Fake Products, These Are 10 Ways

ऑनलाइन शॉपिंग के इस दौर में किसी सामान को छूना या उसका वास्तविक अनुभव कर पाना संभव नहीं है. यह बायर के लिए तो एक समस्या की तरह है, लेकिन ऑनलाइन मार्केटप्लेस में बैठे लोगों के लिए नकली सामान बेचने का बड़ा जरिया भी है. हम आपको आज बता रहे हैं कि किन तरीके से आप नकली सामान की पहचान कर सकते हैं और इस तरह की ऑनलाइन धोखाधड़ी से बच सकते हैं.

1. क्या कीमत सही लग रही है? :-

अगर आपको किसी सामान की कीमत बहुत आकर्षक लग रही तो ज्यादा संभावना इस बात की है कि प्रोडक्ट में कुछ गड़बड़ हो. आप यह पता करिए कि उस तर्क के प्रोडक्ट पर अधिकतम कितना डिस्काउंट संभव है. ब्रांडेड आइटम, लग्जरी प्रोडक्ट आदि पर एमआरपी (MRP) की तुलना में 70-80 फीसदी का डिस्काउंट नहीं मिलता. अगर इस तरह की छूट मिल रही तो समझ लें कि आइटम नकली है.

2. ख़राब पैकिंग :-

ब्रांडेड प्रोडक्ट पैकेजिंग और साज सज्जा पर बहुत खर्च करते हैं. पैसे खर्च करने के साथ ही वे इसे ग्राहक तक पहुंचाने में भी इस बात का बहुत ख्याल रखते हैं कि वह सही हालत में उन तक पहुंचे. अगर आइटम के पैकिंग ख़राब है, बॉक्स कटा-फटा है या देखने में बिलकुल घटिया लग रहा है तो यह नकली प्रोडक्ट की पहचान हो सकती है. अगर आपको कोई प्रोडक्ट बिना पैकिंग के ही मिल गया तो यह निश्चित रूप से नकली है.

3. लिखावट में ग्रामर/स्पेलिंग की गलती :-

नकली प्रोडक्ट को पहचानने का यह सबसे आसान और आम तरीका है. गलत स्पेलिंग या ग्रामर की गलतियां ब्रांड के साथ नामुमकिन है. अगर कंपनी पैकिंग पर अपना नाम ही सही नहीं लिख पाएंगी, तो वह प्रोडक्ट की क्वालिटी और दूसरी चीजों पर ध्यान कैसे दे पायेगी, इस तथ्य के साथ समझें कि आपको नकली उत्पाद थमा दिया गया है. कई बार नकली सामान बेचने वाली कंपनियां भी मशहूर ब्रांड का नाम कॉपी कर लेती हैं और स्पेलिंग के एक लेटर को हटा देती हैं, जिससे कि वह क़ानूनी कार्रवाई से बच सके. ध्यान से नाम पढ़ें और नकली सामान से बचें.

4. फेक वेबसाइट :-

अगर आप ऑनलाइन शॉपिंग कर रहे हैं तो वेबसाइट की सचाई पर गौर करें. अगर वेबसाइट ही फर्जी है तो प्रोडक्ट निश्चित रूप से नकली होगा. युआरएल सावधानी से चेक करें और देखें कि वहां ताले का निशान बना है या नहीं. असली वेबसाइट https से शुरू होगा जहां आपका पेमेंट करना सिक्योर होगा, बजाय http के. इन दो वेबसाइट पर यूआरएल का एड्रेस चिपकाकर भी आप उसकी सचाई चेक कर सकते हैं. www.scamadviser.com और whois. domaintools.com. यह आपको बता देगा कि साईट सही है या नहीं.

5. घटिया सामान :-

नकली उत्पाद आमतौर पर बहुत घटिया होते हैं. असली पार्ट्स की जगह इनमें नकली और घटिया पार्ट्स लगे होते हैं. इनमें आपको सस्ता प्लास्टिक, चमड़े की जगह रेक्सीन, सस्ता ग्लास, कमजोर कपड़े और पहले से इस्तेमाल किया गया सामान दिख जायेगा. यही नहीं सामान की बनावट में भी आपको कुछ अंतर दिख सकता है.आप इसे छूकर, देखकर महसूस कर सकते हैं कि सामान नकली है.

6. वादे और मिसमैच :-

कंपनी सामान पर कोड, सीरियल नंबर, मॉडल नंबर, ट्रेडमार्क और पेटेंट संबंधी सूचना जैसे बहुत से विवरण छापती है. नकली उत्पाद कंपनियां इनमें से बहुत सी जानकारी कॉपी करना भूल जाती हैं. आप इन नंबर को चेक कर भी प्रोडक्ट के असली-नकली होने का पता लगा सकते हैं.

7. लोगो या फॉन्ट धुंधला होना :-

स्पेलिंग की तरह नकली प्रोडक्ट पर लोगो, ब्रांड का नाम और ट्रेडमार्क भी धुंधला देखा जा सकता है. आपको बस सावधानी से इसे वाच करने की जरूरत है. अगर आप असली और नकली लोगो को एकसाथ देखें तो आपको अंतर आसानी से समझ आ जायेगा. अगर आपकी समझ में देखने से अंतर पकड़ में नहीं आ रहा है तो आप इसकी फोटो खींचकर ओरिजिनल वेबसाइट पर तुलना कर लीजिये अंतर पकड़ में आ जायेगा.इनमें फॉन्ट का साइज और उसके लिखने के तरीके से लेकर कुछ भी अलग हो सकता है. लोगो का रंग और प्रिंटेड टेक्स्ट भी नकली उत्पादों के मामले में अलग हो सकता है.

8. कॉन्टैक्ट डीटेल्स नहीं होना :-

अगर प्रोडक्ट पर फिजिकल एड्रेस, ईमेल, फोन नंबर और कॉन्टैक्ट डीटेल्स नहीं हैं, तो प्रोडक्ट नकली हो सकता है. यह दरअसल चिंता की बात है कि कैसे कोई कंपनी सामान बेचकर ग्राहक को भूल जाना चाहती है. अच्छा है कि आप ऐसे प्रोडक्ट को भूल जायें. अगर डीटेल्स हैं तो आप कंपनी की वेबसाइट पर जाकर उसे मिलाएं.

9. एक्सेसरीज नहीं होना :-

आपने जो सामान ख़रीदा है उसमें मौजूद एक्सेसरीज के बारे में पैक पर जिक्र होता है. अगर अंदर कोई सामान नहीं है तो वह नकली उत्पाद की निशानी हो सकता है.इनमें इंस्ट्रक्शन मैनुअल, वारंटी कार्ड, वायर, प्लग और अन्य चीजें शामिल हैं. अगर कुछ भी गायब है तो आप सेलर या डिस्ट्रीब्यूटर को फोन कर इस बात की जानकारी दे सकते हैं. अगर शॉपिंग ऑनलाइन हुई है तो बॉक्स खोलने की पूरी प्रक्रिया का वीडियो बना लें, इससे आपको बहुत मदद मिलेगी.

10. अन ऑथोराइज्ड सेंटर :-

इलेक्ट्रोनिक्स, अप्लायंसेज, गैजेट्स या दूसरे ब्रांडेड आइटम ऑथोराइज्ड सेंटर से ही खरीदें. अगर आपको दूसरी किसी जगह से बढ़िया डिस्काउंट मिल रहा है तो उसके ऑथोराइज्ड सेंटर से पहले पता करें, फिर वहां से शॉपिंग करें.